जमशेदपुर: बिष्टुपुर के चित्रकूट धाम (गोपाल मैदान) में चल रही राम कथा में मुरारी बापू ने जमकर शेर,शायरी,गाने,गजल तो गाये ही साथ ही उनके मुँह से अचानक एक शव्द निकला जिसे सुनकर लोग सन्न रह गए बो शव्द था “अल्लाह जाने”साथ ही इस शव्द को स्पष्ट करते हुए बापू ने कहा कि मै कथा में राम जाने तो कहता ही हूँ साथ ही अल्लाह जाने भी कहता हूँ।
आपको बता दे मुरारी बापू की ये धारणा है कि इस्वर एक है इस लिए बो अल्लाह और राम में कोई अंतर नही रखते। मुरारी बापू ने कहा की मेरे अंदर राम का भी वास है और अल्लाह का भी ।उन्होंने कहा- मुझसे पूछा जाता है, बापू आपने यह क्या कह दिया। मैं कहता हूं ‘मेरे अंदर अल्लाह दबा हुआ है, वह निकलता है’। कथा के क्रम में बापू ने कहा कि मेरे जीवन की एक घटना है। मैं छोटा था।
मां सावित्री की गोद में था, उम्र ‘अल्लाह जाने’, लेकिन होश था। वह मेरे मस्तक पर मलिया घुमाती थी। मैं कहता कि क्या कर रही हो मां, तो वह कहती तेरे दिमाग पर राम लिख रही हूं। दादा कहते तेरे दिल में राम डाल रहा हूं। पिता प्रभुदास हाथ में हाथ लेकर अंगुली फिराते थे और कहते थे राम लिख रहा हूं,और शायद मुझ पर ईश्वर की कृपा रही की उस भक्ति प्रदेश गुजरात से आता हूँ ये भी बड़ी कृपा है परमात्मा की।
मुरारी बापू द्वारा अल्लाह जाने कहने पर गुजरात से आए भक्तों ने कहा कि बापू ने पहली बार यह बात कही है।वल्लभू यूथ आर्गनाइजेशन के तत्वावधान में चल रही राम कथा के दूसरे दिन बापू ने विनोद करते हुए शेर सुनाया हमको तो अपनी दीवानगी से इतनी ही शिकायत है, उसको तो अपना वक्त गुजारना था, हम समझे मोहब्बत है’ अगली कड़ी में बापू ने फिल्म ‘काजल’ (1965) का गीत गाया ‘तोरा मन दर्पण कहलाए, भले-बुरे सारे कर्मो को देखे और दिखाए..’। इसमें गुजरात के नाडियाद से आई भजन गायक भारती बेन व्यास ने समां बांध दिया।