प्रवेश पत्र यानी एंट्री कार्ड परीक्षा में प्रवेश दिलाने हेतु परीक्षा के समय अध्यापक विद्यार्थियों को निशुल्क वितरण करते हैं लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश संस्कृत विद्यालय के अध्यापकों ने प्रवेश पत्र का धंधा बना रखा है जी हां जिस प्रवेश पत्र को निशुल्क वितरण करना चाहिए वही विद्यार्थियों से पैसे लेकर दिया जाता है, और ऐसा करने वाला केवल एक मात्र सरकारी विद्यालय नहीं है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग कई संस्कृत विद्यालयों की यही हालत है विद्यार्थियों से बातचीत के दौरान हमें इस बारे में पता चला कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर मुजफ्फरनगर शामली जैसे कई क्षेत्रों में संस्कृत विद्यालय है और उन संस्कृत विद्यालयों में प्रवेश पत्र के नाम पर अध्यापक ठगाई कर रहे हैं। बता दें कि यह काम आज से नहीं बल्कि 15 सालों से चला आ रहा है और तो परीक्षार्थियों को यह पता भी होता है कि एंट्री कार्ड यानी प्रवेश पत्र के लिए हमें कोई पैसा नहीं देना पड़ता है।
क्योंकि उसी फॉर्म में से जो फॉर्म भरते हैं प्रवेश पत्र भी बन कर आता है लेकिन फिर भी इस प्रवेश पत्र के लिए उन्हें 300 रु. से 1 हजार रु. तक देना पड़ता है क्योंकि इनकी सुनने बाला कोई नही।अब देखना यह होगा कि क्या योगी सरकार का शिक्षा विभाग इस ठगाई के काम को बंद करा पाएगी या नहीं।