अनुज अवस्थी, कठुआ:  जम्मू में कठुआ के उस गांव का वो घर वीरान और सूनसान हो चुका है। जिस घर में आसिफा की आवाज की किलकारी और कभी-कभी पिता की डांट-फटकार इन सबको तो जैसे इस गमजदा सन्नाटे ने निगल लिया हो। सूनी हो चली हैं वो गलिंया, पतझड़ आ गया है उन पेड़ की शाखाओं पर जो खड़-खड़ करके आसिफा से बात करते थे जब वो जंगल में मवेशी चराने जाया करते थी।

अब उस घर में ताला लटक रहा है और उस ताले पर लटक रही है हरे रंग की ताबीज, शायद घर की हिफाजत की दुआओं के साथ। लेकिन ये दुआयें आसिफा की हिफाजत न कर पाई , शायद बदुआओं में असर ज्यादा था।

अाठ साल की आसिफा को देवस्थान(पूजा स्थल) में बंदी बना कर रखा गया और रोज उसके साथ दुष्कर्म किया गया। ये दरिंदे इतने कठोर दिल थे कि इन्हें जरा भी दया नहीं आई। इतना ही नहीं इन्होंने उत्तर प्रदेश के अपने रिश्तेदार को फोन करके कहा कि अगर मजे लेने हों तो आ जाओ। जज के सामने पेश चार्जशीट में ये जानकारियां मौजूद हैं। इन मर्दों की जंघाओं के तले वो कराहती रही, दबी आवाज से चीखती रही लेकिन उसकी सुध लेने वाले कोई नहीं।

आसिफा के शरीर में जब तक जान रही उसे हवस का शिकार बनाया गया। उसे हर रोज नशे की गोलियां खिलाई गई। बाद में उसकी हत्या कर जंगल में फेक दिया। बात यहीं नहीं रुकी इसमें भी हिंदु-मुसलमान की राजनीति को घुसेड़ दिया गया। आखिर किस हिंदुस्तान में हम जी रहे हैं जहां मानवता को तो जैसे सरेआम बाजार में नीलाम कर दिया गया।

आसिफा का परिवार कठुआ से पलायन कर चुका है। अब शायद ही उसे उम्मीद होगी कि उन्हें कभी इंसाफ मिलेगा। वहां के प्रशासन को इस मामले को लेकर मुस्तैदी बरतनी होगी नहीं और उस परिवार को इंसाफ दिलाना होगा नहीं तो आसिफा की मौत के साथ-साथ इंसाफ की भी हत्या होगी।