पटना : सरकार को सोते देख पटना हाईकोर्ट ने राजधानी पटना में पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण के मामले का संज्ञान लिया. कोर्ट ने राज्य सरकार व नगर निगम से पूछा-दो साल में पटना में कितने पौधे लगाए गए, बताएं. और यह भी कि पटना को हरा-भरा बनाने के लिए क्या किया जा रहा है?
न्यायमूर्ति ज्योति शरण व न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण की खंडपीठ ने मंगलवार को गौरव कुमार सिंह की जनहित याचिका को सुनते हुए यह निर्देश दिया. याचिका में सड़क निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई-छंटाई, डिवाइडर पर पेड़-पौधों की कमी एवं इसके चलते राजधानी में बढ़ते प्रदूषण की व्यापक चर्चा है.
राज्य सरकार व पटना नगर निगम से जानना चाहा कि पटना में हरियाली लाने के लिए कोई एक्शन प्लान है भी या नहीं? अगर है तो उसे कोर्ट में पेश करें. कोर्ट ने सख्त अंदाज में टिप्पणी की- ‘पेड़ों की कटाई कैसे करते हैं? शहर में सार्वजनिक स्थल के पेड़ों की नंबरिंग की गई है या नहीं? पेड़ों के कटने के बाद वहां पुनः पौधे लगाने की कोई कार्ययोजना है या नहीं? पटना की चौड़ी सड़कों के डिवाइडर पर घांस तक नहीं है. वहां छोटे पौधे क्यों नहीं लगाते?’
याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि पुराने पेड़ों की कटाई होने के बाद दोबारा पौधरोपण नहीं किया जा रहा है. शहर में धूल से होने वाला प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है. राज्य सरकार की तरफ से वकील अंशुमान सिंह ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि सरकार पेड़ लगाने की कार्ययोजना जल्द कोर्ट में पेश करेगी. इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी.