मनुस्मृति एक ऐसा प्राचीन ग्रंथ है जिसमें मनुष्य की सारी गतिविधियां पाई जाती है इससे महाराज मनु के द्वारा ऋषि मुनियों को सुनाया गया . इस पुस्तक में मनुष्य को क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए ऐसे बहुत बहुत महत्वपूर्ण बातें बताई गई ..

क्यों जलाई अम्बेडकर ने मनुस्मृति 

मनुस्मृति का कानून इस देश में चल रहा होता अगर इस का विरोध अंबेडकर ने नहीं किया होता और अंबेडकर ने इसे क्यों जलाया बस इतनी सी बात इस पुस्तक में जातिवाद ज्यादा है ऐसा सोच कर के इस पुस्तक का कानून लागू नहीं किया और अपना कानून बनाकर लागू कर दिया इस पुस्तक में ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र इन चारों में से शुद्र को बहुत नीच कहा है लेकिन आप अगर इस बारे में Google पर पढ़ेंगे तो आपको जानकारी ज्यादातर गलत मिलेगी आपको बताया जाएगा कि उसमें मनुस्मृति में क्षत्रिय वैश्य शूद्र को नीच बताया है और ब्राह्मणों को सर्वश्रेष्ठ तुलना दी है लेकिन जिस व्यक्ति ने उस पुस्तक का अध्ययन किया ही नहीं वह व्यक्ति क्या जाने उस पुस्तक में जो लिखा है जो कानून बताए गए हैं वह अगर इस देश में लागू होते तो आज किसी प्रकार का अपराध नहीं हो सकता क्योंकि वहां पर इतने कठोर एवं भयानक दंड अपराधी को बताए गए अगर उस में ब्राह्मण का सर्वश्रेष्ठ वर्णन आया है तो उस पुस्तक में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति ब्राह्मण कुल में जन्म ले और ब्राह्मण कर्म ना करें तो वह ब्राह्मण नहीं होता इसी प्रकार क्षत्रिय वैश्य शूद्र सब के बारे में बताया है लेकिन इसे कुछ नासमझ लोग न समझ सके और उन्होंने इस महान प्राचीन ग्रंथ को जलाया ।