अनुभव और जोश के मिश्रण को मिली टीम की कमान

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी पहली नई टीम बना लिया। राहुल गांधी की टीम उन चेहरों पर फोकस किया गया है, जो पूरी तरह से कांग्रेस में सक्रिय नजर आ रहे हैं। साथ ही राहुल की टीम में से परंपरागत कांग्रेसी चेहरों को हटाया गया है, राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक गुरू माने जाने वाले दिग्विजय सिंह को भी अपनी टीम में जगह नहीं दी है। सुशाल कुमार शिंदे, सी.पी जोशी, कमल नाथ, जनार्दन द्विवेदी, मोहन प्रकाश जैसे दिग्गज नेताओं की छटनी की गई है। उन्हें 23 लोगों की टीम में जगह नहीं दी गई है। उनकी जगह राहुल गांधी ने सक्रिय और जोश से लबरेज चेहरे पर भरोसा जताया है। अलग-अलग प्रांतों से वैसे चेहरों को चुना गया है, जो लगातार पार्टी फोरम की बातों को देश तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने दिसंबर में पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने के बाद अपनी पहली टीम बनाई है। इन चेहरों से राहुल गांधी को काफी उम्मीदें हैं।

विश्वसनीय चेहरों पर जताया भरोसा

अगर सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी इस बात को लेकर अडिग रहे कि उनकी टीम में वैसे चेहरों की भर्ती की जाए जिनकी सिफारिशें की गई जा रही थी। माना तो यह भी जा रहा है कि उन्होंने अपनी टीम में सोनिया गांधी की भी चलने नहीं दी है। हालांकि उन्होंने सोनिया गांधी के विश्वसनीय सदस्यों को अपनी टीम में शामिल किया है। भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, गुलाम नवी आजाद, अंबिका सोनी, मल्लिका अर्जुन खड़गे, आनंद शर्मा जैसे राहुल की टीम का हिस्सा बने रहेंगे।

आक्रामकता को मिली तरजीह

दरअसल राहुल गांधी आगामी 2019 के चुनाव को लेकर बड़ी संजीदगी से फेसला लेना चाहते हैं। वो अपनी टीम में वैसे चेहरों को चाह रहे थे जो खुलकर आक्रामक अंदाज में मीडिया में या अपने-अपने क्षेत्रों में भाजपा नेताओं से बहस कर सकें। शायद इसलिए ही अपने प्रवक्ता टीम की कमान उन्होंने रणदीप सुरजेवाला को दे दिया है, अक्सर उन्हें पार्टी की बात को रखने और भाजपा के खिलाफ बयान देने में नरमी नहीं बरतते देखा जाता रहा है। कुछ यही हाल अजय माकन का भी है, उन्हें भी पार्टी फोरम में रहते हुए बयानों के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही मीडिया में अपनी बेबाक राय रखने वाले राजीव त्यागी, पी.एल पुनिया, पवन खेड़ा भी इस टीम का हिस्सा हैं।

नौजवान चेहरों को मिला मौका

राहुल की टीम में नए चेहरों की भी कोई कमी नहीं है, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितेंद्र सिंह, आरपीएन सिंह, राजीव सत्व, गौरव गोगोई, जितीन प्रसाद जैसे चेहरों के अलावा अरूण यादव जो मध्य प्रदेश के हैं एवं नए चेहरे हैं जिन पर राहुल गांधी ने राहुल गांधी ने चार साल पहले भी मध्य प्रदेश हेड के रूप में चयनित करके भरोसा जताया था, उन्हें भी अपनी टीम में जगह दी है। मध्य प्रदेश चुनाव के मद्देनजर रखते हुए साथ ही 2019 की तैयारियों को देखते हुए भी राहुल ने एक ऊर्जावान और अपने हमउम्र ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भरोसा जताया है। कहा यह भी जा रहा है कि ज्योतिरादित्य को मध्य प्रदेश की सफलता के बाद नई कमान भी दी जा सकती है, हालांकि दिग्विजय सिंह भी चुनावी सिजन में मध्य प्रदेश में मुस्तैदी से संचालन में व्यस्त हैं, परंतु मध्य प्रदेश की राजनीतिक कमान उन्हें पहले भी दी जा चुकी है। इसलिए चुनावी सफलता के बाद नए प्रयोग को बिल्कुल खारिज कर देना उचित नहीं है।

क्षेत्रीय राजनीति पर रहेगी नजर

अनुभव और जोश से भरी इस टीम में वैसे चेहरों पर जोर दिया गया है जो क्षेत्रीय दलों से गठबंधन बनाये रखने में भी सक्षम हो, क्योंकि अक्सर देखा गया है इस मोर्चे पर टीम सोनिया की सक्रियता रहती थी। राहुल गांधी ने भी इस पद्धति को बरकरार रखते हुए ही अजय माकन, अशोक च्वहाण, गुलाम नवी आजाद, मुकुल वासनिक, ए के अंटनी जैसे चेहरे शामिल किये हैं।

2019 की है पूरी तैयारी

अपनी इस नवनिर्मित टीम के माध्यम से राहुल गांधी कांग्रेस के भविष्य को एक नयी दिशा देना चाहते हैं, जिसमें आक्रामकता, कुशलता, जोश, जानकारी और नेतृत्व की क्षमता हो। साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव 2019 के लिए उनके ये पयादे मोदी सरकार की पोल खोलने में और उनसे टक्कर लेने में कमतर न आंके जायें। राहुल गांधी जानते हैं अगर मोदी सरकार को टक्कर देना है तो उन्हें अपनी टीम को हर मोर्चे पर सक्रिय दिखाना आवश्यक है। इसलिए उनकी टीम में अनुभव और जोश का मिश्रण तैयार किया गया है। साथ ही खुद राहुल गांधी भी ने भी अपने भाषणों में सरकार के खिलाफ आक्रामक रूख को ढाल लिया है। राहुल गांधी ने देश के अंदर और विदेशों में भी सरकार के खिलाफ अपनी बेबाक राय रखने का काम कर रहे हैं। बिल्कुल इसी तर्ज पर राहुल ने अपनी टीम का भी चयन किया है। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी की नई टीम मोदी सरकार के खिलाफ किस प्रकार प्रदर्शन करती है।