दिल्ली: पीएम मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मंगलवार को कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के ही शायराने अंदाज को दोहराते हुये बुधवार को बशीर बद्र के ही एक शेर के साथ कांग्रेस को जवाब दिया।

आपको बता दें कि मल्ल‍िकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण के दौरान बशीर बद्र का शेर पढते हुये कहा था कि था-दुश्मनी जमकर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे, जब कभी हम दोस्त हो जाएं तो शर्मिंदा न हों।

इसी शेर के जवाब में पीएम मोदी ने डॉ. बद्र का ही यह शेर पढ़ा- ‘जी बहुत चाहता है सच बोलें, क्या करें हौसला नहीं होता.’

मोदी ने कहा कि क्या खुद कांग्रेस के कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने खड़गे की इस शायरी से कोई सबक लिया है. पीएम के भाषण के दौरान सदन में बीजेपी की सहयोगी टीडीपी के सांसद आंध्र के मुद्दे पर ‘ड्रामा बंद करो, जुमलेबाजी बंद करो, धमकाना बंद करो’ जैसी नारेबाजी करते रहे. इससे कई बार पीएम तैश में भी आए, लेकिन उन्होंने अपना भाषण जारी रखा. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबको बोलने का हक है, लेकिन सदन को बंधक बनाने का हक किसी को नहीं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति किसी दल या पार्टी के नहीं होते हैं. हमारे देश में राज्यों की रचना अटल बिहारी वाजपेयी ने भी की थी, उन्होंने तीन राज्यों की रचना की थी, लेकिन कोई हंगामा नहीं हुआ था. किसी भी राज्य को कोई भी समस्या नहीं हुई थी।

पीएम ने कहा कि आपने (कांग्रेस) भारत का विभाजन किया और देश के टुकड़े किए और जो जहर बोया उसके कारण ये हंगामा हो रहा है।