सबसे बड़ा दान क्या है-
दान देना मनुष्य जाति का सबसे बड़ा तथा पुनीत कर्तव्य है ,इसे कर्तव्य समझ कर दिया जाना चाहिए और उसके बदले में कुछ पाने की इच्छा नहीं करनी चाहिए !
अन्न दान महादान है, विद्यादान उससे बड़ा दान है।
अन्न से क्षण भर की तृप्ति होती है, किंतु विद्या से जीवन पर्यंत तृप्ति होती है।
ऋग्वेद में कहा गया है
संसार का सबसे श्रेष्ठ दान ज्ञान दान है क्योंकि चोर इसे चुरा नहीं सकते, न ही कोई इसे नष्ट कर सकता है यह निरंतर बढ़ता रहता है और लोगों को स्थाई सुख देता है।
भविष्य पुराण में लिखा है ।
दानों में तीन दान अत्यंत श्रेष्ठ हैं गौ दान, पृथ्वी दान, और विद्यादान ।
यह दुहने ,जोतने और जानने से सात कुल तक पवित्र कर देते हैं।
मनुस्मृति कहती है – जो दाता दान आदर के प्रति ग्राही को दान देता है और प्रतिग्राही यानि दान लेने वाला उस दान को आदर से ग्रहण करता है तो वह दोनों ही स्वर्ग को जाते हैं।
लेकिन जो दानी अपमान से दान देता है और दान लेने वाला भी आदर से दान नहीं लेता तो वह दोनों ही नरक भोगते हैं।
अन्याय से कमाए हुए धनदान करने बालो के संबंध में स्कंदपुराण में लिखा है।
श्लोक-
न्यायोपार्जित वित्तस्य,दशमांशेन धीमत:।
कर्तव्यो विनियोगश्च,ईस्वर प्रीत्यर्थमेव च ।।
अर्थात- अन्याय पूर्वक अर्जित किए हुए धन का दान करने से कोई पुण्य नहीं होता , दानरूप कर्तव्य का पालन करते हुए भगवत प्रीति को बनाए रखना भी आवश्यक है।