कोलकाता. विश्व भारती यूनिवर्सिटी के एक पूर्व बांग्लादेशी छात्र रिफत बिन सलाम रूपम ने ‘एंग्री टैगोर’ पोस्टर बनाई है, जो मैनेजमेंट के द्वारा कथित रूप से कैंपस का रंग भगवा करने के प्रयास के खिलाफ छात्रों के आंदोलन को तेज कर सकता है.

विश्व भारती यूनिवर्सिटी एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है जो पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में स्थित है. इसकी स्थापना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी जिन्होंने इसे विश्व भारती कहा था. विश्व भारती का अर्थ है भारत के साथ दुनिया का सामंजस्य.

छात्रों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि कुलपति विद्युत चक्रवर्ती कैंपस में भगवा विचारधारा को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, जो विश्व भारती के भावना के खिलाफ है. छात्रों और बुद्धिजीवियों के समुदाय के बीच सोशल मीडिया पर लोकप्रिय ‘एंग्री टैगोर’ पोस्टर में काले रंग की पोशाक पहने गुस्से में रवींद्रनाथ टैगोर को बाएं हाथ को पीछे और दाहिने हाथ को ऊंचा उठाते हुए ‘स्टॉप’ के साथ दिखाया गया है.

एंग्री टैगोर का पोस्टर बनाने वाले रिफत ने कहा, “मैं विश्व भारती यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनने के लिए सम्मानित महसूस कर रहा हूं. भले ही मैं 2019 में यूनिवर्सिटी से पास हो गया लेकिन मैं अभी भी भावनात्मक रूप से टैगोर के इस ‘गुरुकुल’ से जुड़ा हुआ हूं. हाल के दिनों में मैंने देखा है कि यूनिवर्सिटी में कुछ मूल्यों और विचारधारा को लागू करने की कोशिश की जा रही है, जो ‘टैगोर’ के विचार नहीं हैं. मुझे बहुत दुख हुआ और इस एंग्री टैगोर पोस्टर के माध्यम से विरोध करने का फैसला किया.”

उन्होंने कहा, “छात्र राजनीति, चर्चा और बहस किसी भी यूनिवर्सिटी में कोई नई बात नहीं है. लेकिन यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होता है, जहां छात्र, शिक्षक और कर्मचारी एक-दूसरे के प्रति सम्मान दिखाते हुए विरोध करते हैं. दुर्भाग्य से वर्तमान कुलपति की राजनीति ने कैंपस में अस्थिरता पैदा कर दी है. छात्र असुरक्षा से महसूस कर रहे हैं, जो पूरी तरह से टैगोर के आदर्श के विपरीत है. यदि ‘गुरुदेव’ आज जीवित होते तो निश्चित रूप से इसका विरोध करते थे और वह छात्रों के साथ खड़े होते.”

हाल ही में, विश्व भारती यूनिवर्सिटी के कुलपति के सीएए पर टिप्पणी और ‘एन्क्रिप्टेड धमकी’ को लेकर सोशल मीडिया में दो वीडियो सामने आए थे. इसके बाद 30 जनवरी को सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी को मीडिया के सामने बयान देने पर प्रतिबंध लगा दिए गए.

इससे पहले, 26 जनवरी को पूर्बापल्ली सीनियर व्बॉइज हॉस्टल में कुलपति कह रहे हैं, ‘भारतीय संविधान को मुट्ठी भर 293 लोगों ने मिलकर बनाया था. आज जो नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे हैं, वे संविधान को वेद बता रहे हैं. लेकिन जिन्हें यह पसंद नहीं खासकर वोटर जो संसद बनाते हैं, इसे बदल देंगे.’

कुलपति के इस बयान की पश्चिम बंगाल में कई लोगों ने निंदा की. पूर्व मेयर और सीपीआई नेता बिकास रंजन भट्टाचार्जी ने इसे राष्ट्रविरोधी करार दिया था. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान को चुनौती देते हुए कुलपति ने न केवल अपनी कुर्सी की प्रतिष्ठा कम की, बल्कि यह राष्ट्रविरोधी कृत्य भी है.