नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार के सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण का बिल लोकसभा में पास होने के बाद राज्यसभा में भी पास हो गया है. अब दोनों सदनों से बिल पारित होने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.

राज्यसभा में करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद संविधान (124 वां संशोधन), 2019 विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दे दी. इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया. लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवार को ही मंजूरी दी थी जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था.

राज्य सभा में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया. विपक्षी ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाये जाने को लेकर सरकार की मंशा पर ऊँगली जरूर उठाया और इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जताई. सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिये लाया गया है.

आपको बताते चले कि राज्यसभा से सवर्णं आरक्षण बिल पास कराना नरेंद्र मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती थी, क्योंकि राज्यसभा में एनडीए के पास सिर्फ 90 सदस्य हैं. जिनमें बीजेपी के 73, 7 निर्दलीय और मनोनीत, शिवसेना की 3, अकाली दल के 3, पूर्वोत्तर पार्टियों के 3 और एक आरपीआई के सांसद शामिल हैं. वहीं विपक्ष के पास 145 सदस्य हैं जिनमें कांग्रेस के 50, समाजवादी पार्टी के 13, टीएमसी के 13, एआईडीएमके के 13, बीजेडी के 9, टीडीपी के 6, आरजेडी के 5, सीपीएम के 5, डीएमके के 4, बसपा के 4, एनसीपी के 4, सीपीआई के 2, जेडीएस का एक, केरल कांग्रेस का एक, आईएनएलडी का एक, आईयूएमएल का एक, निर्दलीय और नामित एक- एक मेंबर शामिल हैं.