जयपुर। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को पेशकश की कि अगर वह अपने दमखम पर आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर पा रहा है तो भारत की मदद ले सकता है। इसके साथ ही सिंह ने कहा कि देश से नक्सलवाद अगले पांच साल में खत्म हो जाएगा।
चुनावी दौरे पर पहुंचे सिंह ने कहा, ‘मैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से पूछना चाहता हूं कि अगर अफगानिस्तान में अमेरिका का सहयोग लेकर तालिबान के खिलाफ लड़ाई हो सकती है तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई क्यों नहीं हो सकती?
पाकिस्तान को अगर लगता है कि वह अकेले अपने दमखम पर आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर सकता तो अपने पड़ोसी देश भारत से भी वह सहयोग ले सकता है।’
कश्मीर के बारे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के कथित बयान पर सिंह ने कहा, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी यह संदेश देना चाहता हूं, मुद्दा कश्मीर नहीं है। कश्मीर तो भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा। मुद्दा है तो आतंकवाद और अगर आतंकवाद पर पाकिस्तान बात करना चाहता है तो बात हो सकती है।’
गृहमंत्री ने कहा, ‘मैं यह दावा नहीं करना चाहता कि आतंकवाद समाप्त हो गया है लेकिन साढ़े चार साल में देश में आतंकवाद की कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। यह केवल कश्मीर में सिमट गया है। वहां भी हालात सुधर रहे हैं। हमने पूरे जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक प्रक्रिया में लाकर खड़ा किया है। आतंकवाद का जहां तक सवाल है इसमें कोई दो मत नहीं है कि यह सबकुछ पाक प्रायोजित है।’
गृहमंत्री ने कहा कि देश और देश की सीमाएं सुरक्षित हैं आतंकवाद में कमी आई है और नक्सलवाद अगले कुछ साल में खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘मैं कह सकता हूं कि देश सुरक्षित है। जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। देश का मस्तक ऊंचा रहेगा।’ सिंह ने कहा, ‘बीते चार साल में पहले की तुलना में नक्सलवाद में 50-60 प्रतिशत की कमी आई है। 90 जिलों का नक्सलवाद आठ नौ जिलों में सिमट कर रह गया है। तीन से पांच साल में यह नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा।’
पत्रकारों से बात करते हुए राजनाथ ने प्रदेश में फिर एक बार बीजेपी की सरकार आने की उम्मीद जताई, तो वहीं उनके निशाने पर मुख्य रूप से कांग्रेस रही। राफेल डील पर कांग्रेस की जेपीसी गठित करने की मांग को खारिज करते हुए कहा, ‘अब जब कांग्रेस यह मामला सुप्रीम कोर्ट में ले गई है, तो उसी के जजमेंट का इंतजार करना चाहिए।’ राजनाथ ने कहा, ‘कांग्रेस ने देश की राजनीति में विश्वास का संकट पैदा किया है। कांग्रेस के लिए मंदिर और गाय चुनावी मुद्दा हो सकता है, लेकिन बीजेपी के लिए यह कोई चुनावी स्टंट नहीं है। यह हमारे सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है।’
-एजेंसियां