पितृदोष आज एक ऐसा दोष है जो अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में हो तो वह व्यक्ति हर प्रकार से दुखी होता है उसके सारे काम रुक जाते हैं हर काम में विघ्न आते हैं तो ध्यान से देखें । अगर आपके पास कुंडली नहीं भी है तब भी आप पर रख सकते हैं कि पितृ दोष है या नहीं अधिकतर पितृदोष के कारण उस घर में संतान ना होना गर्भ नष्ट होना लड़की का विवाह बड़ी आयु में होना ,कोई काम बनते बनते बिगड़ जाए ऐसा तभी होता है जब कुंडली में पितृदोष हो ।
पितृदोष तभी लगता है कुंडली में जब हमारा कोई पूर्वज भटक रहा हो यानि उसका उद्धार ना हुआ हो उसकी आत्मा भटक रही हो तब पितृदोष बनता है और जब कोई युवा पितृ हो तो समझना चाहिए उसकी इच्छाएं अधूरी रह गई है उसके ही कारण वह भटक रहा है ।
नोट~ आज अधिकतर कुंडलियों में पितृदोष पाया जाता है वह इसलिए क्योंकि कलयुग के प्रभाव से व्यक्ति पाप ग्रसित हो गया है और जो व्यक्ति पाप ग्रसित हो जाए उसका उद्धार नहीं होता है इसीलिए अधिकतर कुंडलियों में पितृदोष पाया जाता है ।
कुंडली में पितृदोष बनने का कारण अथवा पितृ दोष कैसे बनता है।
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‘ अगर किसी की कुंडली में सूर्य पाप ग्रह से ग्रसित हो या पाप ग्रह की सूर्य पर दृष्टि हो तो उस कुंडली में पितृदोष होता है , दूसरा जब कोई पुण्य ग्रह पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो या पाप ग्रह से युक्त हो तब पितृदोष बनता है वैसे तो पितृदोष के अनेक कारण होते हैं लेकिन आप को एक विशेष कारण यही जान लेना चाहिए कि अगर कोई पाप ग्रह पुण्य ग्रह पर दृष्टि डालता है अथवा साथ होता है तो पितृदोष बनता है ।
पित्र दोष के उपाय-
किसी विद्वान पंडित से सवा लाख पितृ गायत्री जप अनुष्ठान कराएं ।
जो अनुष्ठान इत्यादि का खर्चा नहीं उठा सकते उनके लिए एक सरल उपाय ~
” सोमवती अमावस्या को (जिस अमावस्या को सोमवार हो) पास के पीपल के पेड के पास जाइये, उस पीपल के पेड को एक जनेऊ दीजिये और एक जनेऊ भगवान विष्णु के नाम का उसी पीपल को दीजिये, पीपल के पेड की और भगवान विष्णु की प्रार्थना कीजिये, और एक सौ आठ परिक्रमा उस पीपल के पेड की दीजिये, हर परिक्रमा के बाद एक मिठाई जो भी आपके स्वच्छ रूप से हो पीपल को अर्पित कीजिये। परिक्रमा करते वक्त :ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र जपें ।