7 स्थानों पर झूठ बोलने से नहीं लगता है पाप जानिए वह कौन से हैं 7 स्थानश्रीमद् भागवत महापुराण में शुक्राचार्य जी ने राजा बलि को समझाते हुए कहा-
श्लोक=
स्त्रीषु नर्म विवाहे च ,वृत्यर्थे प्राण संकटे ।
गो ब्राह्मणार्थे हिंसायां,
नानृतं स्याज्जुगुप्सितम्।।
अर्थ= इस श्लोक में बताया है की 7 जगहों पर झूठ बोलने बालों की कोई व्यक्ति निंदा नहीं करता है अथवा वह कार्य निंदनीय नहीं होता है पाप नहीं होता है । बो 7 स्थान कौन-कौन से हैं ।
देखें ~
1- स्त्रियों को प्रसन्न करने के लिए झूठ बोलने पर पाप नहीं लगता है ।
2- हास परिहास अर्थात हंसी मजाक के समय झूठ बोलने से पाप नहीं लगता है।
3- विवाह में वर कन्या आदि की प्रशंसा करने से मतलब झूठी प्रशंसा करने से वह झूठ निंदनीय नहीं होता अथवा पाप नहीं लगता है।
4- अपनी जीविका की रक्षा के लिए अर्थात अपना धंधा कामकाज रोजी रोटी के लिए अगर झूठ भी बोलना पड़े तो वह झूठ ही निंदनीय नहीं होता है।
5- प्राण संकट होने पर अर्थात अगर आप को जान का खतरा है तो उस समय आप झूठ बोल सकते हैं यानि किसी ने आप को धमकी दी है कि आप अगर सच बोल दोगे तो आप को मार दिया जाएगा तो वहां आप झूठ बोल सकते हैं वहां पर आप निंदनीय नहीं होंगे।
6- गौ और ब्राह्मण के हित के लिए झूठ बोलना पाप नहीं होता है ।
7- किसी को मृत्यु से बचाने के लिए झूठ बोलना पाप नहीं होता है निंदनीय नहीं होता है।
यह श्रीमद्भागवत के नवम स्कंध के 19 वें अध्याय मैं राजा बलि को शुक्राचार्य जी ने उपदेश किया था और यह भी कहा था कि जैसे यहां 7 वें स्थान में जो लिखा है किसी को मृत्यु से बचाने के लिए इसका मतलब यह नहीं है कि किसी दोषी इंसान को हम बचा दें।
अगर आपको लगता है कि व्यक्ती निर्दोष है और आप के झूठ से यह बचाया जा सकता है तो उसे बचा लेना चाहिए ।
लेख़क ~ ✍
पं. अतुल त्रिपाठी