डॉ.अभिषेक कुमार:

बीमारियों का घर का हैं दुसित पानी
हमलोग़ बचपन से सुनते आ रहे हैं “जल ही जीवन हैं” परन्तु आज कल के परिवेश मेँ इस वक्त्वय मेँ थोड़ा संसोधन की जरुरत हैं, होना ये चाहिए की स्वच्छ जल ही जीवन हैं.जाने अनजाने मेँ हमलोग़ प्रदूषित जल का सेवन करते रहते हैं.जिस कारण हमें कई रोगो का सामना करना परता हैं.
दूषित जल से होने वाली बीमारियां –
जल से होने वाले रोगों की बहुत लम्बी सूची हैं,लेकिन मुख्य रूप से प्रोटोज़ोआ,पैरासाइटिक इन्फेक्शन,और वायरस हैं.प्रोटोज़ोआ मेँ मुख्यत अमीबिएसीस और ज़ियार्डिएसिस हैं,जिसमे रोगी साधारण दस्त से लेकर प्रबल डिसेंट्री तक हो सकता हैं,जिसमे मल के साथ खून और म्यूकस आ सकते हैं.प्रोटोज़ोअल डिजिज बैक्टेरियल से भिन्न होते हैं,इस लिए उनकी दवा भी भिन्न होती हैं.पारासाईटिक इन्फेक्शन मेँ मुख्यत सिस्टोसोमिएसिस,ड्रेकेण्कुपिएसि स फीताकृमि,टीनिएसिस,फेसिलोसेएसि स,इकाइनोकोकोसिस,आदि हैं.इनमे से कुछ पानी पिने से कुछ त्वचा के संपर्क मेँ आने से हमारे शरीर मेँ प्रविष्ट होते हैं.पारासाइट हमारे आंतो मेँ अपना जीवनचक्र चलाते हैं,मल के साथ बाहर आकर अपनी संख्या बढ़ाते हैं.इनके अंडे या लार्वा को नग्न आँखों से नहीं देखा  जा सकता हैं.आंतो मेँ रह कर ये हमारे भोजन के पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं होने देते हैं.ये हमारे शरीर मेँ खून की कमी,एलर्जिक रिएक्शन,बुखार यहाँ तक की कभी-कभी इनकी संख्या बढ़ने पर आंतो मेँ अवरोध पैदा हो जाता हैं.बैक्टेरियल डिजीज में प्रमुख रूप से टायफाइड,कोलोरा,इ-कोलाई,साल्मो नेलोसिस,लेजियोनेलोसिस,आदि है.जयादातर बैक्टेरिया डायरिया एवं डिसेंट्री करवाता है.
वायरस इन्फेक्शन में SARS ,हेपेटाइटिस-ए,पोलियो है.जिसमे केवल सिम्टम के लिए ही दवा की आवश्यकता होती है.हेपेटाइटिस-ए मुख्य रूप से यकृत पर बुरा प्र्भाव डालता है.जिस कारण आँखों में पीलापन,पेशाब में पीलापन आदि दिखना शुरू हो जाते है.
क्या करे,क्या न करे-
-पानी को उबाल कर छान कर प्रयोग में लाये.
-बड़ी मात्रा में पानी संचित हो तो उसमे क्लोरीन टैबलेट डालकर उसका प्रयोग करे.
-ओजोनाइज्ड पानी में ही तैरने का अभ्यास करे.
-ख़ाली पाव खेतो में जाने से बचे.
-अधपका भोजन न खाये.
-दस्त अथवा उल्टी होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दे.जितना हो सके पानी पियें.चिकित्सक पास जाने से पहले ORS का घोल लेते रहे.
-शौच के बाद और भोजन ग्रहण करने से पहले हाथ साबुन से अच्छे से धोये.
– चिकित्स्क के परामर्श से कृमि मारने की दवा समय-समय पर लेते रहे.
जलजनित  रोगों को हलके में न ले.