अनुज अवस्थी, नई दिल्ली: जब से भाजपा की मोदी सरकार ने ऐतिहासिक धरोहर लाल किले के रख रखाव का जिम्मा डालमिया ग्रुप को सौंपा है। तब से तकरीबन समूचे देश में ये चर्चा का विषय बना हुआ है। कि मोदी सरकार अपने स्वार्थ के लिए इस तरीके के कदम उठा रही है। इस सब के बीच भाजपा की केंद्र सरकार ने लाल किले के रख रखाव को लेकर अपना रुख साफ किया है। मोदी सरकार ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि ये कदम लाल किले की बेहतरी के लिए उठाया गया है।
पर्यटन मंत्री के.जे. अल्फोंस ने कहा कि इससे स्मारकों का रखरखाव और विजिटर्स को मिलने वाली सुविधाएं बेहतर होंगी। वहीं अल्फोंस ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि लाल किले को डालमिया भारत ग्रुप को लीज पर या रीब्रैंडिंग के लिए दिया गया है। आपको जानकारी के लिए बता दें कि पर्यटन मंत्रालय ने पिछले वर्ष सितंबर में एक योजना शुरू की थी, जिसमें प्राइवेट और सरकारी कंपनियों को ‘स्मारक मित्र’ बनने के लिए आमंत्रित किया गया था।
इस सब के इतर सभी विपक्ष पार्टियों ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने देश की ऐतिहासिक धरोहर को एक तरीके से प्राइवेट कंपनी डालमिया ग्रुप के हवाले करके लाल किले की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। सरकार अगर लाल किले का रख रखाव रखने में सक्षम नहीं है तो मोदी सरकार को तत्काल रुप से इस्तीफा दे देना चाहिये।