गोवर्धन पीठ शंकराचार्य:
एक व्यक्ति ने शंकराचार्य से प्रश्न किया कि करपात्री जी से ज्यादा विवेकानंद जी को विश्व में लोग जानते हैं और उनका इतना ज्यादा चर्चा में होना किस कारण को दर्शाता है ऐसा उन्होंने करपात्री जी से महान क्या कार्य किया जिससे उन्हें आज कम से कम भारत में तो सभी लोग विवेकानंद जी को जानते ही हैं लेकिन करपात्री जी को शायद भारत में भी हर व्यक्ति नहीं जानता ऐसा क्यों है।
शंकराचार्य बोले:
विवेकानंद जी कि विदेशों तक चर्चा क्यों होती है इस पर दुनिया में कोई कुछ भी कहे लेकिन मेरी नजर में उनके विख्यात होने का कारण एक ही है मनुवाद के खिलाफ वह मनुवाद के खिलाफ थे और आज जिसे भी फेमस होना है वह मनुवाद को गाली देने लगे या मनुवादियों को गाली देने लगे वह फेमस हो जाएगा क्योंकि मनुवाद से अंग्रेजों को विदेशियों को सभी उन लोगों को जो इस देश के लिए सही नहीं है उन्हें खतरा है इस मनुवाद से खतरा है।
क्या है मनुवाद:
मनुवाद का मतलब मनुस्मृति-मनुस्मृति एक प्राचीन पुस्तक है जिसमें मनुष्य की वर्ण व्यवस्था बताई गई है वर्ण व्यवस्था यानी जातिवाद और इस मनुस्मृति में ही शूद्र को पिछड़ा वर्ग बताया है कम बुद्धि वाला बताया है और ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि का सेवक बताया है, और यही कारण है कि अंबेडकर ने भी इस पुस्तक को जलाकर विरोध प्रदर्शित किया था और आज भी इस मनुवाद को लेकर मनुवाद के विरोध को लेकर कुछ लोग अपनी दुकान चला रहे हैं जिसमें एक बड़ा नाम रंजीस ओशो का था और आज भी कई लोग मनुवाद का विरोध करते आ रहे हैं और वो लोग फेमस भी काफी हो रहे हैं इसीलिए शंकराचार्य ने कहा कि जिसे फेमस होना है वे मनुवाद को गाली देने लगे।